Monday, April 20, 2009

આ માનવી...

આ માનવી કેવો નિષ્ઠુર છે
બોલે છે કાંઈ, વિચારે છે કાંઈ,
અને કરે છે કાંઈ
વિચારે છે કપટી છું કેટલો
કોણ જુએ છે હૃદય માંહી
આ માનવી...

સંબંધોમાં શોધે છે ફાયદા
ધંધામાં કરે છે વાયદા
અને રોજ નવા કરે છે તાયફા
આ માનવી...

પૈસાથી તોલે છે સંબંધોને
ખોટ જાય તો તોડે છે સંબંધોને
સંબંધોનો વેપાર કરી લીધો
આ માનવી...

ચહેરા પર ખંધુ સ્મિત
અને હૃદયમાંહી શકુનિ ઝરતો
લાલચ અને કપટને સાથ રાખતો
ઈશ્ર્વરને બદનામ કરી દીધો
આ માનવી...

- Loveable Poet

SWACh BHARAT

A girl asked to pappu wo kya hai jo COW ke pas 4 or mere pas 2 hai.
Pappu : Leg.

Girl : Wo Kya hai jo tumhari pant me hai aur meri pant me nahi hai
Pappu : Money

Girl : Wo Kya hai Jo log Din ki Bajaye Raat ko bistar par karna pasand karte hai.
Pappu : Nind

Girl : Wo kya hai jo ladki pehle bar karwane me Dard ki wajah se roti hai
Pappu : Kan me ched

MORAL : Aap Bhi apni Niyat Papu Ki tarah saf rakhiye aur ek swach BHARAT BANAYE.

- Loveable Poet

अगर यही जीना है तो फिर मरना क्या है

शहर की इस दौड़ में दोड़ के करना क्या है..?
गर यही जीना है तो फिर मरना क्या है...!!?

पहली बारिश में ट्रेन लेट होने की फ़िक्र है...,
भूल गए भीगते हुए टेहेलना क्या है..!!

सीरियल के किरदारों का सारा हाल है मालुम..,
पर माँ का हाल पूछने की फुर्सद कहा है..!!

अब रेत पे नंगे पाँव टहलते क्यों नहीं..?
१०८ है चैनल पर दिल बहेलते क्यों नहीं..??

इन्टरनेट से दुनिया के तो टच में है..,
लेकिन पड़ोस में कौन रहता है जानते तक नहीं..!!

मोबाईल, लैण्ड लाइन सब की भरमार है..,
लेकिन जिगरी दोस्त तक पहुंचे ऐसे तार कहा है..??

कब डूबता हुए सूरज को देखा था याद है..?
कब जाना था शाम का गुज़रना क्या है..!!??

तो फिर दोस्तों, शहर की इस दौड़ में दोड़ के करना क्या है..?
अगर यही जीना है तो फिर मरना क्या है...!!

- Loveable Poet

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